श्रीमद्भागवत विद्यालय

१८ पुराणों में श्रीमद्भागवत महापुराण भगवान् श्रीकृष्ण का ही शब्दमय विग्रह है । स्वयं भगवान् वेदव्यास के अशान्त मन को शान्ति का अनुभव कराने वाला दिव्य ग्रन्थ है । समस्त कामनाओं की पूर्ति हेतु यह एक श्रेष्ठतम साधन है ।

श्रीमद्भागवताख्योऽयं प्रत्यक्षः कृष्ण एव हि ।
( महात्मय ६/३० )

śrīmadbhāgavatākhyo'yaṃ pratyakṣaḥ kṛṣṇa eva hi
(mahātmaya 6/30)

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जन मानस के अशान्त हृदय को शान्ति, पितृगणों की मुक्ति तथा समस्त लौकिक व पारलौकिक कामनाओं की पूर्ति कराने के साथ भगवद् प्राप्ति कराने वाले इस दिव्यातिदिव्य ग्रन्थ की सम्यक प्रकार से शिक्षा परमावश्यक है । इसी भाव के साथ विप्र बालकों के लिए सम्वत् २०२१ सन् १९६४ को परम् पूज्य भागवतभूषण पुरणाचार्य पं. श्री श्रीनाथजी शास्त्री “श्रीदादागुरुजी” द्वारा श्रीधाम वृन्दावन में एक श्रीमद्भागवत  का विद्यालय निर्माण किया । जिसने अब तक हजारों श्रीमद्भागवत के विद्वानों के निर्माण किये । जो आज भी यथा स्थान अपनी सेवा प्रदान कर रहा है ।

इस विद्यालय में ११ अध्याय प्रतिदिन मूलपाठ के क्रमानुसार मास पारायण की एक नयी विधि का आरम्भ हुआ, जो आगे चलकर सभी विद्यालयों के लिए एक नवीन आदर्श बना । इस प्रकार का विद्यालय एक भागवती के लिए तो अत्यंत आवश्यक है और आज इसका नितान्त अभाव है । प्रात: ८ से १० बजे तक चलने वाले इस मूलपाठ में लगभग ८५ से १०० विद्यार्थी सम्मिलित हो जाते हैं  ।

सायं ४:०० से ५:३० बजे तक श्रीमद्भागवत के श्लोक, गद्य एवं पद्यों का अर्थ एवं उनकी व्याख्या की जाती हैं । इस विद्यालय के विद्यार्थियों की परीक्षा होती है एवं अंत में संस्था द्वारा प्रमाणपत्र प्रदान कराया जाता था ।

सन् २०१४ में इस विद्यालय की स्वर्ण जयंती का भव्य समायोजन श्रीधामवृन्दवन में बड़े उत्साह के साथ सम्पन्न हुआ, जिसमें देश की अनेक विभूतियाँ सम्मिलित हुई ।

श्रीमद्भागवत महापुराण
की आज भी त्रिवर्षीय शिक्षा पाठ्यक्रम के अन्तर्गत विधिवत गुरु परम्परा से अध्ययन की व्यवस्था है ।

जहाँ मासपारायण क्रम से प्रतिदिन ग्यारह अध्याय श्रीमद्भागवत का मूलपाठ व वार्षिक क्रम से यथार्थ शब्द ज्ञान के साथ समुचित कथा प्रशिक्षण भी दिया जाता है । साथ ही साप्ताहिक क्रम से प्रतिदिन गीता पाठ व आचार्य के द्वारा श्री रुद्राष्टाध्यायी का भी पाठ पढ़ाया जाता है ।

श्रीमद्भागवत विद्यालय की दिनचर्या :

ब्रह्ममुहूर्त में किये जाने वाला साधन सीधे ब्रह्म से जोड़ता है, क्योंकि ब्रह्ममुहूर्त की सकारात्मक ऊर्जा १००% रहती है । अत: ब्रह्ममुहूर्त की बेला प्रातः चार बजे से दिनचर्या का आरम्भ होता है ।

प्रातः ४:०० बजे ब्रह्ममुहूर्त में जागना
प्रात: ४:०० से ५:०० स्नानादि
प्रात: ०५:०० से ०५:४५ संध्यावंदन
प्रात: ०५:५० से ०६:२० योग
प्रात: ०७:०० से ०७:२५ आरती
प्रात: ०७:३० से ०७:५० बालभोग ( अल्पाहार )
प्रात: ०८:०० से १०:०० श्रीमद्भागवत-श्रीमद्भगवद्गीता पाठ
प्रात: १०:०० से ११:०० कर्मकाण्ड
प्रात: ११:०० से १२:०० श्रीमद्भागवत का श्लोकाभ्यास
मध्याह्न १२:०० से ०१:०० राजभोग ( भोजन-प्रसाद )
अपराह्न १:०० से ०२:०० अल्पविश्राम
अपराह्न ०२:१५ से ३:०० संस्कृत-व्याकरण
सायं ०३:३० से ०५:०० श्रीमद्भागवत के पद्यार्थ व गद्यार्थ
सायं ०५:०० से ०६:०० क्रीड़ा
सायं ०६:१० से ०६:४० संध्यावंदन
सायं ०६:४५ से ७:०० श्रीमद्भागवत की स्तुति-गीत पाठ
सायं ०७:०० से ०७:२० आरती
रात्रि ०७:३० से ०८:१५ ज्योतिष
रात्रि ०८:३० से ९:०० रात्रि भोजन-प्रसाद
रात्रि ०९:०० से १०:०० स्वाध्याय
रात्रि १०:०० बजे शयन

नोट: यह दिनचर्या ऋतुकाल आदि के आधार पर परिवर्तनीय है तथा द्वितीय एवं तृतीय वर्ष के छात्रों के लिए विषय पूरे हो जाने की स्थिति में रिक्त समय स्वाध्याय आदि का रहता है ।

प्रवेशार्थियों के लिए

श्रीमद्भागवत विद्यालय में प्रवेशार्थियों के लिए आयु १३ से १९ वर्ष है ।

प्रवेश से पहले प्रत्येक अभ्यर्थी को एक लिखित परीक्षा तथा मौखिक परीक्षा का प्रावधान है तथा व कुण्डली परिक्षण भी किया जा सकता है । उसके बाद ही प्रवेश की पात्रता निश्चित होगी । तदोपरान्त प्रवेशार्थी तथा उनके अभिवावकों का परिचय के रूप में कुछ प्रामाणिक दस्तावेज (आधार कार्ड, पैन कार्ड आदि ) लिये जायेंगे । सब कुछ उचित पाये जाने पर तथा प्रवेशार्थी व अभिवावकों के द्वारा गुरुकुल की निर्धारित नियमावली के अनुपालन करने की सहज स्वीकृति के बाद, गुरुकुल प्रबंधन के द्वारा निर्णीत होने पर ही प्रवेशार्थी बालक को प्रवेश प्राप्त होगा । सभी छात्रों को गुरुकुल के निर्धारित नियमों का अनुपालन दृढ़ता से करना होगा ।

शिक्षा का समर्थन करें

गुरुकुल में पढ़ने वाले आर्थिक दृष्टि से असमर्थ बच्चे की एक वर्ष की उपचारात्मक शिक्षाशास्त्र समर्थन करें ।

आपके इस योगदान से वैदिक यात्रा गुरुकुल में प्रदान की जाने वाली शिक्षा-सेवा, ऋषिकुमार के उत्तम भविष्य के निर्माण में महान सहायक होगी । ऋषिकुमार की एक वर्ष की फीस, यूनिफॉर्म, आवास एवं भोजन में सहभागी बनें, ताकि वे वैदिक-शिक्षा का लाभ प्राप्त कर सके । आपका यह एक क़दम भारत को पुन: जगद्गुरु बनाने वाले महान व्यक्तित्तव का निर्माण करने में सहायक हो सकता है ।

सहभगिता

प्रवेश के लिए

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