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6 अप्रैल
2020
मनुष्य जीवन की सार्थकता “आत्मज्ञान” में

आत्मज्ञान प्राप्त करना मानव जीवन का मूल लक्ष्य है । यह संसार कैसे बना ? पदार्थों का आदि कारण क्या है? शरीर और अस्थि, मांस और रक्त आदि की क्या विभिन्नता है और इन सब से आत्मा कैसे अलग है ? मनुष्य को इस सब का ज्ञान अवश्य प्राप्त करना चाहिए । ( ऋग्वेद १/१६४/४ ) …..

24 मार्च
2020
सन्मार्ग पर चलकर श्रेष्ठता पायें

अच्छे, बुरे सभी कर्म मनुष्य से ही होते हैं । दुर्बलता मनुष्य के लिए अज्ञानता का प्रतीक है । श्रेष्ठता प्राप्त करने के लिए आत्मबल प्राप्त करना चाहिए । यह तभी सम्भव है जब मनुष्य बुराइयों को त्यागकर सन्मार्ग पर चले । ( अथर्ववेद २/११/१ )…..

6 मार्च
2020
आत्मबल से मन को वश में करें

हमारे मन की शक्ति अनंत है ।वह सुप्त और जागृत अवस्था में भी हमेशा क्रियाशील रहता है । वह ज्योति स्वरूप है, समय व कुछ न कुछ सोचता और यहां-वहां भटकता रहता है । कभी भूतकाल की घटनाओं का चिंतन करता है और कभी भविष्य के कल्पनालोक में भ्रमण करता है । मन प्रतिक्षण किसी

31 जनवरी
2020
“परमात्मा” ही सांसारिक कष्टों से मुक्ति दिलाते हैं

विद्वान तथा बुद्धिमान लोग अपने ज्ञान से, चिंतन-मनन और अनुभव से यह जानते हैं कि हर पदार्थों में परमात्मा हैं। वही सम्पूर्ण जगत को आश्रय देता है। उसी से सारी सृष्टि प्रकट होती है । सभी प्राणी उसी से पैदा होते हैं और प्रलयकाल में उसी में विलीन हो जाते हैं । ( यजुर्वेद ३२/८

10 जनवरी
2020
पुरुषार्थ और परोपकार के मार्ग पर चलें

समुद्र को कामना नहीं होती फिर भी अनेक नदियां उसमें आकर मिलती हैं । इसी प्रकार उद्योगी पुरुषों के पास लक्ष्मी सदैव रहती हैं । अर्थात् जो व्यक्ति उद्योगी है, मेहनती है, पुरुषार्थ करता है उन्हें धन का अभाव कभी नहीं होता । कहा भी गया है ‘उद्यमेन हि सिद्धयन्ति कार्याणि न मनौरथैः । नहि

Vaidik Sutra