ब्लॉग

26 दिसम्बर
2019
पाप का मूल है क्रोध

क्रोधी व्यक्ति हमसे सदैव वैसे ही दूर रहें जैसे पक्षियों को उड़ा देने से वे बहुत दूर चले जाते हैं क्योंकि क्रोधी व्यक्ति के पास रहने से स्वभाव उल्टा हो जाता है और धर्म की हानि होती है । ( ऋग्वेद १/२५/४ ) काम, क्रोध और लोभ आत्मा का नाश करने वाले तीन शरीर के

3 दिसम्बर
2019
आलस्य के परित्याग से इच्छित वस्तुओं की प्राप्ति सम्भव

जो जागृत हैं, आलस्य और प्रमाद से सदैव सावधान रहते हैं उन्हीं को इस संसार में ज्ञान विज्ञान प्राप्त होता है । उन्हीं को शान्ति मिलती है, वे ही महापुरुष कहलाते हैं । ( ऋग्वेद ५/४४/१४ ) जो व्यक्ति जागृत है वह हमेशा सतर्क रहता है । “उत्तिष्ठत जागृत प्राप्य बरान्निबोधत”, उठो, जागो और जब

9 अक्टूबर
2019
ईमानदारी और पुरुषार्थ से धन कमाओ

अपने व्यवसाय से खूब धन कमाओ और उसे उत्तम कार्यों में खर्च करो, इससे तुम्हारी यश, कीर्ति बढ़ेगी । (अथर्ववेद ३/२४/५) वेदों में धनोपार्जन की महत्ता को स्वीकार किया गया है । मनुष्य केवल अपने दोनों हाथों से एक ही कार्य न करें बल्कि समाज के अन्य वर्गों को भी सहयोग लेकर सैकड़ों हाथों से

19 सितम्बर
2019
निःस्वार्थ भाव से परोपकार करें

मनुष्य के जीवन में विपत्तियां, कठिनाईयां, विपरीत परिस्थितियां और कष्ट की घड़ियां आती ही रहती हैं । सुख-दुःख जीवन रथ के दो पहिए हैं । इनसे कभी डरना या घबराना नहीं चाहिए । कठिनाइयां मनुष्य को संघर्ष करने की शक्ति देती हैं और उसकी उन्नति में और आत्मिक विकास में सहायक होती है । (सामवेद-६५३

4 जुलाई
2019
आध्यात्मिक गुण है पवित्रता

हे परमात्मा ! मेरे हृदय में भक्तिभाव और कर्मण्यता का विकास हो । मुझे आरोग्य और खुशहाल जीवन प्राप्त हो । मुझे बाह्य और आंतरिक दोनों तरफ से पवित्र बनाइए । ( अथर्व वेद ६/१९/२ )

Vaidik Sutra